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महामंडलेश्वर परमेश्वर देवराहा बाबा मोरकुटी वृन्दावन से आये सैकड़ों साधु सन्त

रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां 9783029649

महामंडलेश्वर परमेश्वर देवराहा बाबा मोरकुटी वृन्दावन से आये सैकड़ों साधु सन्त

महामंडलेश्वर परमेश्वर दास त्यागी बाबा मोरकुटी आश्रम वृन्दावन क़े पावन सानिध्य में 16 वीं 18 दिवसीय सैकड़ों साधुओं की ब्रज चौरासी कोस पदयात्रा ने किया कामवन में प्रवेश। तीर्थराज विमलकुण्ड विराजित गुर्जर धर्मशाला पर बाबा रामधन दास ने सभी साधु सन्तों का गर्मजोशी से स्वागत किया। यहां पर पदयात्रा प्रवास कर कामवन की विभिन्न कृष्ण की लीलास्थलियों क़े दर्शन।शाम क़े प्रसाद की सभी सन्तों को व्यवस्था मास्टर तेजराम शर्मा कनवाड़ा ने की।
समस्त साधुओं ने तीर्थराज विमलकुण्ड में स्नान आचमन कर परिक्रमा की तथा मुख्य मन्दिर विमल बिहारी क़े दर्शन व पूजन किये।
विमल बिहारी मंदिर के सेवाअधिकारी संजय लवानिया ने कामवन व तीर्थराज विमलकुण्ड का माहात्म्य सुनाते हुए क़हा कि जनश्रुति के अनुसार चातुर्मास्य काल में विश्व के सारे तीर्थ ब्रज में आगमन करते हैं।
एक बार चातुर्मास्य काल में तीर्थराज पुष्कर ब्रज में नहीं आये। श्रीकृष्ण ने विमल कुण्ड को तीर्थराज की उपाधि से अलंकृत कर दिया । इसमें स्नान करने से तीर्थराज पुष्कर में स्नान करने की अपेक्षा सात गुणा अधिक पुण्यफल प्राप्त होगा। तब से यह कुण्ड ‘विमल कुण्ड’ के नाम से विख्यात हुआ। इस कुण्ड के किनारे श्रीकृष्ण की भक्ति प्राप्त करने के लिए बड़े-बड़े ऋषि-महर्षियों ने वास किया है। महर्षि दुर्वासा और पाण्डवों का निवास यहाँ प्रसिद्ध ही है। प्रत्येक वर्ष ब्रजमण्डल परिक्रमा-मण्डली अथवा परिक्रमा करने वाले यात्री यहाँ निवास करते हैं तथा यहीं से काम्यवन की परिक्रमा आरम्भ करते हैं।
कामवन दर्शन को आये साधु सन्तों ने कामवन विराजित गोविन्ददेव जी ,गोपीनाथ जी ,चौरासी खम्भा ,गयाकुण्ड ,श्रीकुण्ड ,कामेश्वर महादेव ,पांच पांडव ,धर्मराज जी ,चित्रगुप्त ,चरण पहाड़ी ,भोजन थाली ,भामासुर की गुफा ,दाऊजी के चरण ,कठला ,मुकुट ,खिसलनी शिला ,सेतुबंध रामेश्वर ,लंका व यशोदा ,अशोक वाटिका ,गोकुल चन्द्रमा जी ,मदनमोहन जी सहित श्री कृष्ण की लीलास्थलियों व चिन्हों के दर्शन किये। पदयात्रा कदम्बखंडी को प्रस्थान कर गयी।

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